लाइव हिंदी खबर :- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रम्प के मुताबिक, इस समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समझौते के बदले ईरान को कोई आर्थिक मदद नहीं देगा और उसका मकसद सिर्फ क्षेत्र में शांति स्थापित करना है। ट्रम्प के इस बयान के बाद पूरी दुनिया की नजरें आने वाले कुछ दिनों पर टिक गई हैं।

हालांकि ईरान ने ट्रम्प के दावे पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि रविवार को समझौता होने की खबर सही नहीं है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी किसी तारीख पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ईरान ने यह भी साफ किया कि उसकी बातचीत टीम की फिलहाल जिनेवा या इस्लामाबाद जाने की कोई योजना नहीं है। वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों देश पहले के मुकाबले समझौते के काफी करीब हैं, इसलिए शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचना चाहिए।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह खुल जाता है और क्षेत्र में तनाव कम होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इसका फायदा भारत समेत उन देशों को मिलेगा जो बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करते हैं।
हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में कई जहाजों पर हमले हुए हैं जिनमें भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं। भारत ने अमेरिकी हमलों पर आपत्ति जताई है और समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की है। ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होता है तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है। फिलहाल दुनिया को दोनों देशों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।