लाइव हिंदी खबर :- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बागी सांसदों का कहना है कि वे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA के साथ मिलकर काम करेंगे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे पार्टी के खिलाफ साजिश बताया है।

NCPI एक छोटी राजनीतिक पार्टी है जिसकी स्थापना साल 2023 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेउली कुंडू ने की थी। पार्टी के रिकॉर्ड के अनुसार उत्तिया कुंडू इसके अध्यक्ष हैं जबकि शेउली कुंडू कोषाध्यक्ष हैं। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे बहुत कम वोट मिले थे। चुनाव के दौरान पार्टी का नारा था कि अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें। अब यही पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।
बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था और अपने समूह को अलग पहचान देने की मांग की है। उनका दावा है कि उनके साथ TMC के दो-तिहाई सांसद हैं इसलिए उन्हें दल-बदल कानून के तहत संरक्षण मिलना चाहिए। दूसरी ओर, ममता बनर्जी और पार्टी के अन्य नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बागी सांसदों को मान्यता न देने की मांग की है।
अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष और अदालतों के फैसले पर टिकी हुई है। यदि बागी सांसदों को मान्यता मिलती है तो वे भविष्य में TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावा कर सकते हैं। ममता बनर्जी अपनी पार्टी और संगठन पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेंगी। ऐसे में आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और भी दिलचस्प होने की संभावना है।