लाइव हिंदी खबर :- भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह दुश्मन की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर सकता है। इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास इतनी उन्नत मिसाइल रक्षा तकनीक मौजूद है। यह नया सिस्टम लगभग 5000 किलोमीटर दूर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने में सक्षम है।

DRDO ने 10 और 11 जून को लगातार तीन सफल फ्लाइट टेस्ट किए। इन परीक्षणों में सिस्टम ने दुश्मन की मिसाइल की पहचान की और उसे लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही रोकने की अपनी क्षमता साबित की। इससे भारत की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। मल्टी लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम कई चरणों में काम करता है। सबसे पहले शक्तिशाली रडार दुश्मन की मिसाइल को पहचानते हैं। इसके बाद कमांड सेंटर खतरे का आकलन करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल को लॉन्च किया जाता है। अगर पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट नहीं कर पाती, तो दूसरी सुरक्षा परत सक्रिय हो जाती है।
यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है जो इसे बेहद भरोसेमंद बनाती है। यह सिस्टम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM जैसे बड़े खतरों का सामना करने में भी सक्षम माना जा रहा है। ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला कर सकती हैं और अक्सर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होती हैं। ऐसे में इस तकनीक का सफल परीक्षण भारत की रणनीतिक शक्ति को नई ऊंचाई देता है। इस उपलब्धि के बाद भारत अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन जैसे देशों की श्रेणी में पहुंच गया है।
यह सफलता सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक भी है। आने वाले समय में यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम भारत की सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।